बरगद पीपल नीम …. / कविता

बरगद पीपल नीम की मीठी छांव भूल गए |

शहरी हवा में ऐसे खोये, गाँव भूल गए ||

अल्हड़ बचपन सरपट गलियाँ

कड़वी निबौरी खट्टी अमिया

बाग-बगीचे खेत-कुएं के चाव भूल गए ||

बरगद पीपल नीम की मीठी छांव भूल गए ||

खेल-खिलौने हुल्लड़ मस्ती

सबसे अनौखी महँगी -सस्ती

मनमौजी जीवन के सारे दाँव भूल गए ||

बरगद पीपल नीम की मीठी छांव भूल गए |

भीड़-भगदड़ शोर-शराबा

सँकरी राहें झूठा दिखावा

शहर की इस हलचल में खुद के भाव भूल गए |

बरगद पीपल नीम की मीठी छांव भूल गए ||

:-महेश कुमार कुलदीप ‘माही’
जयपुर