वर्षा आई (बाल कविता )

छम छम करती आई वर्षा रानी
सब के मन को भाई वर्षा रानी

काले मेघ करते मनमानी
जिधर देखो उधर पानी ही पानी

चारों तरफ छायी हरयाली
धरती माँ की हुई छटा निराली

भर भर सरिता कल कल करती जाए
इठलाती हुई सागर से मिलने जाए

सब बच्चों के मन हर्षाये
भीग भीग के शोर मचाये

दूर खेतों में फसल लहराए
इन्द्रधनुष भी खड़ा बाहें फैलाये

धरती माँ का हुई अनुपम श्रृंगार
मिला प्रकृति से सबको अमूल्य उपहार

हितेश कुमार शर्मा

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