परवाह

न चांद न सितारों की मैंने परवाह की।
न बंजर न नजारों की मैंने परवाह की।।
परवाह की तेरी खुद की भी न परवाह की 1

न धूप न छाव की मैंने परवाह की।
न जिंदगी न मौत की मैंने परवाह की।।
परवाह की तेरी खुद की भी न परवाह की 2

2 Comments

  1. sunil kumar 08/08/2015
  2. Haya 13/08/2015

Leave a Reply