उन दो कदम के सफर में……

ज़िन्दगी का सफर …
ट्रैफिक लाइट सिग्नल की तरह है …
कभी हरी तो कभी लाल ,…
कभी गति तो कभी रुकावट …
कभी जगमगाहट तो कभी अँधेरा …..
सफर लम्बा है और शायद कठिन भी …
पर हमसफ़र परफेक्ट ट्रैफिक पुलिस के तरह हो ,
तो सफर मज़ेदार भी हो जायेगा और आसान भी ….
इस सफर में तुम दो कदम साथ दो मेरा ,
हम पूरी सफर में साथ देने का वादा करते हैं ….
तन्हाई के तार के कनेक्शन को काटकर ,
खुशियों की बतियाँ जलाना शुरू करोगे
उन दो कदम के सफर में ,
हम इस बात का वादा करते हैं …
नफरत के स्विच को ऑफ करोगे ,
और प्यार वाले स्विच के बटन को ऑन करोगे ..
मासूमियत वाली ज़िंदगी में शार्ट सर्किट हो जायेगा ,
और इश्क़ के इलेक्ट्रान से ज़िन्दगी में नयी धारा बहेगी ….
उन दो कदम के सफर में ,
इस बात का हम वादा करते हैं ….

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