आईना

चहरे तो अक्सर धोखा देते है ,
सच तो आईना बोलता है !
हां पे हां मिलाते लोग यहां ,
गिले-सिकवे तो आईना खोलता है !!

शायर –अनुज तिवारी “इन्दवार”

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