वो नहीं आता

वो हमारी गली में ,
हर रोज आता है ,
हमारे गांव के स्कूल में ,
छुट्टी होने का इन्तजार करता है .
जब उसके कान ,
घंटियों की आवाज सुनती है ,
वो बेतहाशा स्कूल के ,
दरवाजे पर जाता है ,
बरगद के पेड़ के नीचे,
अपनी महफ़िल सजाता है .
बच्चे भूखे प्यासे ,
उसकी महफ़िल में आ रमते है .
राजा की रानी से लड़ाई ,
गुड्डे की गुड़िया से सगाई ,
बड़े ही हंस -हंस के सुनाता है .
अजीबोगरीब बातें बता कर ,
सबका दिल जीत जाता है .
अंत में नन्ही हाथों से चवन्नी-अठन्नी पाता है .
पता नहीं क्यों ,
कुछ दिनों से
वो नहीं आता .
घंटियां अब भी बजती है ,
बच्चे बरगद के पेड़ को देखते है ,
पर ,
वो नहीं आता ,
एक दिन अचानक ही ,
वो मुझे दिख पड़ा .
मैंने पूछा -क्यों नहीं आते .
वो बोला-बाबू क्या बताये आपसे ,
इस गरीब की एक ही बेटी थी ,
वो अब मुझे छोर गयी
अब किसके लिए करूँ ,
गुड्डे की बारात अब ना सजेगी ,
राजा की रानी से लड़ाई अब ना होगी .

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