अब तो बस ,

अब तो बस ,
यही आखिरी चाहत है ,
ज़िन्दगी की वीरनगियों पे ,
मौत का जलसा सजाऊँ ,
रेत में मिल जाऊँ.
अब तो बस ,
यही आखिरी चाहत है ,
अपनी ज़िन्दगी के,
नाव को मझधार में डुबोऊँ.
रेत में मिल जाऊं .
अब तो बस ,
यही आखिरी चाहत है ,
अपनी ज़िन्दगी के दीए को ,
खुद ही बुझाऊं,
रेत में मिल जाऊं .
अब तो बस ,
यही आखिरी चाहत है ,
अपने कफ़न का इंतजाम ,
खुद कर जाऊं ,
रेत में मिल जाऊं.
अब तो बस ,
यही आखिरी चाहत है ,
अपनी चिता में आग,
खुद ही लगाऊं,
रेत में मिल जाऊं.

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