सावन..

सावन..

झूम-झूम सावन आयो
घिरी-घिरी फिर बदरा छायो
रिमझिम-रिमझिम पड़े फुहार
झीर-झीर पुरवा बहे बयार

तिनक-धिनक-धिन नाचे मोर
जब-जब छाये घटा-घनघोर
गोपियों के संग रास रचावे
मुरली-मधुर बजावे चितचोर

रूप धरा का हरा-भरा
हो मनभावन श्रृंगार सजा
वन-उपवन सुन्दर-चितवन
लगे सृष्टि ने नया रंग-रचा

जब सूरज की पहली किरण
नभ से धरती से पे पड़ती है
वर्षा-बूंदो से टकरा कर
पृथ्वी सतरंगी करती है

सावन का महीना है ऐसा
सब मस्त-मगन हो जावे
झूमे-नाचे खेतों में
किसान सावनी गावे

क्रमशः

प्रभात रंजन
उपडाकघर रामगर
प० चम्पारण(बिहार)

One Response

  1. VIKAS AREN 05/08/2015

Leave a Reply