भीख

दानी देता है कहूँ या खुदा ही देता है
तकदीर हमें तो हरदम दगा ही देता है

हाथ फैलाऊँ तेरे या भक्तों के सामने
वक्त बेवक्त तूँ हमें सजा ही देता है

मन्त्रों के साथ-साथ कलमा भी पढ़ी थी
पेट भरने के लिए बस हवा ही देता है

जानता है भक्त कौन, कौन है पाखण्डी
फिर भी उनकी गाडी तूँ चला ही देता है

भूखा मांगे भीख कहे पंडित मांगे तो दानं
पाँव छूते ढोंगि का हमें धक्का ही देता है
२२-०७-२०१५

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  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/01/2016

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