हर चतुर्थी हमें अपने दरबार बुलाते हो

हर चतुर्थी हमें अपने दरबार बुलाते हो ,
सुबह -सुबह मंगल आरती संग अपने दर्शन देते हो ….
क्या माँगू तुझसे देवा……
बिन मांगे ही तुम सब कुछ दे जाते हो …..
आँखें भी ख़ुशी से नम हो जाती हैं ….
जब आपसे हमारी मुलाकात हो जाती है ….
आप भाई- बहन के प्यार का अनोखा एहसास दिलाते हो ….
मन खुश हो जाता है मंगलमूर्ति-गणपति …..
जब हर चतुर्थी हमें अपने दरबार बुलाते हो…
ऐसे ही साथ देते रहना ओ मेरे देवा…..
तेरे ही शरण में रहकर करती रहूँ तुम्हारी सेवा…..

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