दो बहनें

शीर्षक -दो बहनें
वो दो बहनें थी ,
एक थोड़ी बातूनी ,
दूसरी थोड़ी अक्खड़ थी .
एक जुबान से कहती थी ,
दूसरी आँखों की भाषा पढ़ा जाती थी
जब भी मैं उन्हें देखता था ,
बस यही सोचता रहता था की ,
क्या अलग है इनमे ,
और
क्या मिलता है इनमे ,
इन सब चीजो को मैं ,
सिर्फ कागजो पर ही लिख पाता था
दोनों हमेशा साथ रहा करती थी ,
अपने दिल को बंद और बालो को खुला रखती थी ,
मैंने देखा था ,
अक्सर उन्हें एक दूसरे के लिए रोते हुए ,
अपनी प्यारी चीज एक दूसरे को देते हुए
मैं नहीं जान पाया उन्हें ,
उनके साथ रहकर ,
मैं उन्हें जान पाया ,
उनका साथ छोड़ कर .
वो दो बहनें थी ,
एक पापा की दुलारी थी ,
दूसरी माँ को प्यारी थी .
सब जानते थे उन्हें ,
सब चाहते थे उन्हें .
पर ,
कुछ था उनके बीच ऐसा ,
जिससे डरती थी वो .
शायद एक दूसरे को खोने का डर
एक दूसरे से दूर जाने का डर .
इस डर को एक दिन हकीकत बनना था ,
ये तो नियति थी उनकी ,
उन्हें अलग होना था .
वो दो बहनें थी
जिन्हे दो परिवारो में जाना था
अपनी खुशिया लुटाना था ,
अपनी खुशबू बिखेरना था . ———————->

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