दोस्ती

तशना-ए-ज़िन्दगी के सफर में तुझे जो मिला वही मिला
थी जुबां किसी की कटी हुई तो ज़ेहन किसी का बिका हुआ
तेरी ज़िद जिन्हे अच्छी लगी वही साथ तेरे रह गए
उन्हें दोस्ती का इल्म था, न कभी जिन्हे तशरीह थी
तेरे साथ के नतीजे में क्या गलत हुआ क्या सही हुआ

2 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 03/08/2015
    • Dr. Nitin Kumar pandey nitin 03/08/2015

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