दिल की चाहत [शेर]

दिल की चाहत पे , यहां कौन यकीन करता है !
जमाना भी सराफत की तौहीन करता है !!

चहरे की चकाचौंध से , बचना मेरे यारो !
ये अक्सर आखो का पानी नमकीन करता है !!

गर्जिस मे भी यहां , खुदगर्जों से दूरी रखना !
वो खुदगर्जी की दुनियां रन्गीन करता है !!

कोई अपना भीड मे , पीछे ना छूट जाये !
जो हरपल आपका जीना मुम्कीन करता है !!

भूल कर भी कभी , उसके सपने ना तोड देना !
जो हरदम आप के सपने हसीन करता है !!

दिल की चाहत पे , यहां कौन यकीन करता है !
जमाना भी सराफत की तौहीन करता है !!

Anuj Tiwari “Indwar”

3 Comments

  1. रकमिश सुल्तानपुरी राम केश मिश्र 02/08/2015
  2. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 02/08/2015
  3. Ankita Anshu Ankita Anshu 03/08/2015

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