काश कोई लौटा दे बीते बचपन के वो पल

हमें ना थी कोई चिंता और ना ही थी कोई फिकर|
खूब किया करते थे मस्ती जा के इधर -उधर ||
कभी किसी की डाँट-मार का ना होता था कोई असर |
पता हीं नहीं चला कब वो हसीन पल गए गुज़र |
काश कोई लौटा दे बीते बचपन के वो पल ||

घर के हर इंसान की रहती थी हम पर नज़र |
सुबह से दोपहर स्कूल में होता था गुज़र-बसर |
खूब मचाया करते थे शोर छुट्टी की घंटी सुनकर |
पता हीं नहीं चला कब वो हसीन पल गए गुज़र |
काश कोई लौटा दे बीते बचपन के वो पल ||

शाम को खेला करते थे दोस्तों के घर-घर जाकर |
ख़ुशी मनाया करते थे कब्बडी में दूसरों को मात देकर |
फिर खूब हँसा किया करते थे उनकी खिल्ली उड़ाकर|
पता हीं नहीं चला कब वो हसीन पल गए गुज़र |
काश कोई लौटा दे बीते बचपन के वो पल ||

कुछ ग़लती करने पर कहा करती थी माँ कान खींचकर|
सुधर जा वरना सुधारूंगी तुझे मैं हॉस्टल भेजकर |
फिर माँ को मनाया करते थे प्यार की एक झप्पी देकर |
पता हीं नहीं चला कब वो हसीन पल गए गुज़र |
काश कोई लौटा दे बीते बचपन के वो पल ||

2 Comments

  1. राम केश मिश्र राम केश मिश्र 01/08/2015
    • Ankita Anshu Ankita Anshu 03/08/2015

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