पल भी दो पल का मेहमान होता है

इस पल को जी लो….हँसकर तुम जी लो ….
पल भी दो पल का मेहमान होता है …..
ऐसा हम सबने ही सुना है ….
क्या गिला किसी से और क्या शिकवा किसी से ……
ना लगाओ किसी की कड़वी बातें तुम अपने दिल से….
उन बातों को तुम यूँ ही मुस्कुरा के टाल दो …..
मन ही मन कुछ गुनगुना के टाल दो …..
हँसने का तुम हमेशा कोई ना कोई बहाना ढूंढो ..
रोने के लिए तो पूरी ज़िन्दगी पड़ी है …..
कुछ सीखना है ज़िन्दगी से तो दोस्ती करना सीखो …
दुश्मनी तो हर कदम पर दस्तक देने के लिए खड़ी है ….
पल भी दो पल का मेहमान होता है …..
ऐसा हम सबने ही सुना है ……
यूँ ही किस्मत को हमेशा न कोसो ….
उसने जो दिया है वो भी कम नहीं है ….
ऐसा तुम सोचो ……
मुकद्दर का लिखा तो कोई नहीं मिटा सकता है…..
फिर भविष्य के लिए क्यों तू चिंतित रहता है …
सँवारना है तो वर्तमान को सँवारो…..
कहीं ना कहीं भविष्य भी वर्तमान से जुड़ा है…..
जरुरत है तो सिर्फ परिश्रम और आत्मविश्वास की ,
हम सब जानते है …
आसान नहीं है सफर इस ज़िन्दगी का…
क्यूंकि कही रास्ता सीधा तो कहीं दो तरफ़ा मुड़ा है…..

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