अपनापन

जब से मिला हूँ तुमसे अच्छा लगता है
हर चेहरे पर तेरा ही चेहरा अच्छा लगता है
हर एक धागे पर छापः है तेरी
मेरे हर खून पर खुश्बू है तेरी
फटा ही सही पर माँ का दामन अच्छा लगता है
इसके पहले और उसके बाद की सुध तुमने ली है मेरी
मानता हूँ जानता हूँ मै और सिर्फ मै या तुम
मेरे बारे मे पूछना झाकना यह धीरे
धीरे अच्छा लगता है
हर चेहरे पर तेरा ही चेहरा अच्छा लगता है |

बार बार तो तुम दिखती नहीं
फिर भी तुम्हारा एहसास अच्छा लगता है
चलो छोड़ो अब फिर मुझे देखो
अब थोड़ा बड़ा हूँ मै
एक बार फिर मुझे परखो
तुम्हारा इस बात पर मुस्कुराना अच्छा लगता है
हर चेहरे पर तेरा ही चेहरा अच्छा लगता है

यदि नहीं मानती की मै अब हो गया बड़ा
तो ना मानो ,तुम्हारे लिए छोटा ही सही
पर अब तो मानो
तुम्हारा मुझ पर इतना स्नेह अच्छा लगता है
हर चेरे पर तेरा ही चेहरा अच्छा लगता है |

कनक श्रीवास्तवा

2 Comments

  1. Manoj 29/07/2015

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