जब खुद को ही खुद से मिलाने चला

जब खुद को ही खुद से मिलाने चला….
मानो ऐसा लगा जैसे कोई अनमोल खज़ाना मिला…..
उस खुद के मुलाकात में कोई नयी बात थी…..
वो बीती रात एक नयी शुरुआत की दस्तक थी …..
हर कुछ बदला बदला लग रहा था……
मन में अनोखे एहसास के साथ नया ज़ज़्बात पनप रहा था ….
जब खुद को ही खुद से मिलाने चला….
सुकून की शीतलता और शांति का भण्डार मिला….
मानो मन के मंदिर में खुशियों का खूबसूरत फूल खिला….
फ़िक्र तो मानो कब्र में दफ़न हो गया हो ….
गम का घना बादल कही दूर खो गया हो…..
कश्ती को भी एक नया किनारा मिल गया हो …
तन्हाई गहरी नींद में जाके सो गयी हो…..
दुःखों की आंधी भी मानो थम सी गयी हो…
और मानो मेरे लिए एक नयी सुनहरी सुबह हो गयी हो…..
ज़िंदगी ने इस मुलाकात में एक नयी पाठ सिखायी…
मुझे कुछ भूली-भटकी बातें याद दिलायी….
ज़िंदगी के किसी भी कठिन मोड़ पर,
कोई भी अपना नहीं …..
हमेशा भरोसा करो किसी और से ज्यादा खुद पे
क्यूंकि खुद से बेहतर कोई दोस्त नहीं…..!!!!!!!!!!

One Response

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 25/07/2015

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