तुम नहीं आती

शीर्षक -“तुम नहीं आती ”
जब तुम आती थी ,
मुझे सपने में,
अपने आने का दस्तक दे जाया करती थी ,
तुम्हारे पायल की आवाज ,
मेरे कानों को स्पर्श कर जाया करता था .
तुम्हारे जुल्फों की लटायें ,
मेरे चेहरे को ढक जाया करती थी .
दरवाजे हमेशा ,
तुम्हारे हाथ से खुलने को बेताब रहते थे .
एक अजीब सा सुगंध ,
तुम्हारे आने का आभास दे जाया करता था .
जब तुम आती थी ,
जीने मरने की कस्मे खाया करती थी ,
खामोश निगाहों से मुझे बुलाया करती थी ,
मुझ पर अपना प्यार लुटाया करती थी .
अब तुम नहीं आती ,
मेरे सपनो में भी .
आँखे अब खुली रहती है ,
दरवाजे हमेशा तुम्हारे राह तकते है .
मेरे कानों में ,
अब सिर्फ़ तुम्हारे लब से निकले ,
आवाज की पुनरावर्ती हुआ करती है .
अब सिर्फ़ तुम्हारी यादें ही,
मेरे साथ रहा करती है ,
अब हवाओं को भी ,
तुम्हारा इन्तजार रहा करता है
पर ,
तुम नहीं आती —————————————Composed बी—-> अभिषेक राजहंस

One Response

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 25/07/2015

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