श्राध्य्भोज

शीर्षक —->श्राध्य्भोज
मेरे गावं का दुखाराम,
आज दुःखी है ,
इस बात से नहीं की ,
उसका बाप गुजर गया ,
बल्कि
इस बात से की,
कैसे करेगा वो श्राध्य्भोज .
उसके पिता चार दिन से भूखे थे ,
गावं वाला कोई पूछने नहीं आया .
पर आज ,
जब उसका बाप गुजर गया .
सुबह-सुबह ही मैनजन जी आये हैं ,
बाप के मर जाने का दिलासा देने के बाद ,
बैठार में आने को कह कर गए हैं .
बैठार में ,
बड़े लोगो के बीच ,
दुखिया रो भी नहीं पाया .
इस बात से नहीं की ,
बाप की ज़मीन बेच कर,
श्राध्य्भोज तो कर देगा .
पर अपने ,
जवान बेटो के लिए क्या बचेगा .
तीन-तीन बेटी के हाथ कैसे पीले होंगे .
पता नहीं कैसे ,
उसके मंन में एक बात सूझी ,
मान ली उसने मैनजन की बात .
और चल पड़ा घर
ये सोचते हुए की ,
अगर मै भी मर जाऊं ,
आज की रात तो ,
नहीं करना पड़ेगा ,
मेरे बेटे को ,
दो-दो श्राध्य्भोज .

2 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 25/07/2015
    • Abhishek Rajhans 04/08/2015

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