।।ग़ज़ल।।चाहत न होती थी ।।

।।गजल।।आदत न होती थी ।।

वजह कुछ भी रही हो पर कोई आहट न होती थी ।।
कोई गम भी नही था तब कही हुज्जत न होती थी ।।

न मंजिल थी न वादा था न तेरी रहनुमाई थी ।।
अकेला था अकेले में कोई दिक्कत न होती थी ।।

मिले हो तुम हमे जब से नजारे खुद अचंभित है ।।
किसी को देखते रहना मेरी आदत न होती थी ।।

मग़र हैरान हूँ कल से तुम्हारी इक झलक पाकर ।।
किसी के पास आने की कभी हसरत न होती थी ।।

करूगा मैं इशारा तो न तुम मौन हो जाना ।।
किसी के दिल दुखाने की कभी चाहत न होती थी ।।

………R.K.M

2 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 24/07/2015
  2. रकमिश सुल्तानपुरी राम केश मिश्र 24/07/2015

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