तू गन्गा की निर्मल धारा

तू मस्त पवन है सावन की ,
मै चक्रवात उठता तूफानी !
तू गन्गा की निर्मल धारा ,
मै यमुना का रमता पानी !!

अमर रहेगे युगो युगो तक ,
अपने प्यार के नाते !
सन्गम गन्गा यमुना का ,
यहा गीत मिलन के गाते !!

तू मीठे फूलो की वाली ,
मै उडता भवरा सैतानी !
तू गन्गा की निर्मल धारा ,
मै यमुना का रमता पानी !!

चन्दा और चकोरा हम तुम ,
जन्म-जन्म के साथी !
ना मिल कर भी साथ-साथ
एक प्रीत यही कहलाती !!

तू चन्दा की चान्दनी जैसे ,
मै चकोर करता निगरानी !
तू गन्गा की निर्मल धारा ,
मै यमुना का रमता पानी !!

मीठे सात सुरो सा सन्गम ,
प्रीत ये तेरी मेरी !
हर एक सुर के ताल मेल सी
चलती जीवन डोरी !!

सात सुरो से सजी हुई ,
तू एक मीठी वाणी !
तू गन्गा की निर्मल धारा ,
मै यमुना का रमता पानी !!

3 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari 18/07/2015
  2. virendra pandey virendra 18/07/2015
  3. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari 18/07/2015

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