तुमने मुझपे उपकार किया ….

तहस-नहस कर डाला था , दिल को उठते तूफानो ने !
समा जलाकर इस दिल पे , तूने मुझपे उपकार किया !!

मै डूब रहा मझधारे पे , मुश्किल से भरे किनारे थे !
आगोश मे भर के मुझको , अपनी बाहो का हार दिया !!

दौलत की अन्धी ये दुनिया , यहा किसी की सगी नही !
तोड जमाने की रस्मे , तुमने मुझसे दीदार किया !!

सासो मे हिम्मत भर कर , उम्मीद जगा दी जीने की !
जब तडफ रहा था जीने को , तूने जीवन उपहार दिया !!

(शायर –अनुज तिवारी “इन्दवार” )

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