हित वाणी -2

मस्तिक तिलक , हाथ माला ,करनी करे काली
मुख में राम नाम और ह्रदय भरी गाली

भाव भंगिमा से लगे ज्यों धरती पर हो देव दूत
है अदा इनकी अजीब बिलकुल जैसे हो भारत के सुपूत

कहे हित, इनके दांव से जो बचा वो विरला हो होगा
नहीं तो है कौन , जिसको इन्होने है नहीं भोगा

इनकी उपस्थिति दर्शाता है भारत का कोना कोना
निज स्वार्थ हेतु , जो दिखाते हैं सबका अपना होना

मनो हित की बात , जब तक नहीं होगा इनका तिरस्कार
तब तक होता रहेगा इंसानियत का नित्य बलात्कार

हितेश कुमार शर्मा