ग़ज़ल –: दागी दामन !!

मान बैठे हिम , वो आगी निकला !
मेरे यार का दामन दागी निकला !!

ये तबस्सुम दी ये आबरू जिसे !
वो बेआबरू अभागी निकला !!

हमने उनका एकतिजाज ना किया !
वो रहजनी का बुनियादी निकला !!

झूठे अफसानो को तामीर करने वाला !
वो बस हुस्न का आदी निकला !!

बेइम्तहान् चाहा था जिसको !
ना पाकी नजर का ना हाजी निकला !!

मखरुती निगाहे निदामत भरी जिन्दगी !
वो अनफास की महबस माजी निकला !!

अनुज तिवारी

3 Comments

  1. ushakiransharma10@gmail.com ushakiransharma10@gmail.com 09/07/2015
  2. SONIKA SONIKA 10/07/2015
  3. SONIKA SONIKA 10/07/2015