ज़िंदगी

ज़िंदगी
कोई जीतने की चाहत रखता है,
कोई प्यार की इबादत करता है |
बड़ा कमजोर है इंसान,
सोचता है पाने को मंज़िल,
पर हाँथ खाली रखता है ||
ज़िंदगी के मायने अलग है यहाँ,
पर मौत की हकीकत एक है |
झूठ स्वार्थ की माया है ज़िंदगी,
पर मौत की शख़्सियत एक है ||
क्या बुरा है क्या भला, किसको पता,
फिर क्यों अपने ही पैमाने में रखते है लोग |
डर से सच भी न कहे,
ऐसे डर में क्यों जीते है लोग ||
द्वारा सोनिका मिश्रा

2 Comments

  1. Anderyas Anderyas 09/07/2015
  2. Kishore Kumar Das 09/08/2015

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