कुछ इश्क की शायरी


जिस तरह बीज से पौध का उगान होता हैं
उसी तरह इशक मे अॉखो का काम होता हैं


खिली हुई जवानी को
न ऐसे बर्बाद कीजिए
छुप छुप के जमाने से सही
पर किसिसे प्यार कीजिए


चान्दनी ने पूछा चान्द से क्यो हो आज तुम उदास
क्या हैं किसी के पास हसीना मुझसे ज्यादा लाजवाव
चान्द ने कहा मत कर गरूर इतना तुझ से भी हैं कोई खास
मेरी कहॉ किसमत एैसी वो तो है अरूण के पास


जिस फूल मे काटें न हो उसे गुलाब नही कहते
जिसके दर्द दरमिंया न हो उसे प्यार नही कहते


जालिम भूख भी इस हाल से तौबा कर जाती हैं
न जाने नीन्द भी नैनो से कहा खो जाती हैं
कोई माने या न माने पर ये सच है यारो
दिल के रोग मे रेगिस्ता भी गुलिस्ता नजर आती हैं


धन दौलत से भरी हैं जिन्दगी
हर सुख सुविधा तूने दी हैं जिन्दगी
फिर भी ये एहसास होता हैं हर पल
कि बिन सनम के तू अधूरी हैं जिन्दगी


गुजारने को तो यू ही गुजार लेते हैं सभी
हंस के या रो के काट लेते है युही
पर जीने की बात करू तो जीते है वही
जिनके साथ होती हैं मुहाब्बत अपनी


खुशनसीब हैं वो प्यार जिनके पास होता हैं
सौ गम मे भी न दिल कभी उदास होता हैं
मेरी मानिए तो प्यार किसी से कर के देखिए
क्योकी जन्नत से भी खास इसका एहसास होता हैं

९०
प्यार अगर करते हैं तो बताना बहुत जरूरी हैं
हर कदम पे बढते हुए जताना बहुत जरूरी हैं
क्योकी बिन कहे प्यार के मायने ही बदल जाते हैं
जैसे परवाने अपने ही शम्मे से जल जाते हैं

११
वो ऑखो मे डाल कर ऑखे
पूछे क्या हाल हैं तुम्हारा
बताउ क्या उसे उसकी
नजर ने दर्द दे डाला

१२
वो कहते हैं हमे एक पल कभी याद तो कर लो
हम कहते हैं तुम्हे भूले वो एक पल तो हो

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