मेरी शायरी


इंशा हर दर्द से हर हाल से लड़ लेता हैं
अस्क आंखो के भी अपने दिल मे दबा लेता हैं
पर वो रो देता हैं जब अपना दगा देता हैं


जरूरत नही देने की जान
जरूरत नही देने की जहान
जो जीतना है किसी का दिल
तो दे दीजिए उसे उसका मान


मेहनत भी जरूरी हैं
रहमत भी जरूरी हैं
पर बड़ा बनने के लिए
बड़ी चाहत बहुत जरूरी हैं


मुहाब्बत खुशिया देती हैं
नई पहचान देती हैं
मगर जब टूट जाए दिल
जला अरमान देती हैं


माया माया करते करते
बेचैन रहा तू हर ईक दिन
जब काया की बारी आई
माया सारी रह गई भिन्न


समुद्र मे भी इसने जहॉ बसा लिया हैं
चान्द पर भी अपना निशा बना दिया हैं
तू ला के को देख माथे पर पसीना
इन्सा ने तो पत्थर को भी भगवान बना दिया हैं


काम एैसा कीदिए
जिसमे हो मन की सन्तुष्टि
रोज रोज कुछ ग्यान बढे
साथ मे हो कुछ उन्नती


कर्मवीर इन्सा के आगे
बुरा वक्त नही रूकता हैं
तू साहस तो लगा कर देख
पर्वत का सर भी झुकता हैं


बुरे लोगो के साथ का
असर बुरा ही पड़े
जैसे कोयला गरम जलाए
ठन्डे मे काला करे

१०
इस दुनिया मे जीना हैं तो
सीख पानी का ढंग
जैसा देख महोल अपना
वैसा कर ले रंग

११
जो दान करे और सबसे कहे
वह दान कहा प्रचार हैं
गुप्त रूप से किया हुआ
थोड़ा भी दान महान हैं

१२
क्यो हाल अपने दिल का किसी से कहूं
क्यो अपने गम का मैं प्रचार करू
जब लेती हैं दुनिया सुन हाल मजा
तो क्यो अपनी छोटी ओकाद करू

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया dknivatiya 09/07/2015
  2. arun kumar jha arun kumar jha 27/04/2017

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