जब बरसात आयी थी मेरे दर पे

जब बरसात आयी थी मेरे दर पे
मैं प्यासा था !!

आंधी आकर गुजर गयी
मैं ठेहरा था
जिसने नींदे चुराई मेरी
वो एक हसीन चेहरा था !

रोजदराज की कश्मकश से
मैं वाक़िफ़ था
प्यार मैं डूबा था
मैं तेरा आशिक़ था !

ये पल पल का खेल हैं
मुज़े तब पता चला
हक़ीक़त सामने थी ये मुज़े
अब पता चला !

तब मैं प्यासा था
प्यार पाने के लिए
अब मैं प्यासा हूँ
मंजिल पाने के लिए !

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