इश्क

ये इश्क भी क्या चीज हैं जब दिल पर छा जाता हैं
दूर तक अंधेरा रौशनी मे बदल जाता हैं
एक अजीब सी खुशी दिलो जा पर छा जाती हैं
जैसे किसी अंधे को दो आखे मिल जाती हैं
जमाने के गिले सिकवे से काम नही होता
इसमे भेद भाव का स्थान नही होता
जिससे लड़े नैना वही भगवान नजर आता हैं
ये इश्क………..
कब हो कैसे हो कहॉ कुछ पता नही
जब होना हो इश्क तो हुए बिन रहता नही
ये रोग हैं एैसा जिसके दर्द की दवा नही
उसके गम मे उदास दिल खुशी मे हर्ष पाता हैं
ये इश्क………
जमाने की बन्दिशे बेकार नजर आती हैं
हर दिवार इस मे छोटी रह जाती हैं
कोई कोशिस करे लाख जुदा दिलो को करने की
जवरन जोर दे किशमत और साथ रहने की
पर आग कहा चाहत की दिल से बुझने पाती हैं
दिल पर तो नाम उसका ता उम्र रह जाती हैं
जब सामने वो आए तो फिर बेताब दिल हो जाता हैं
ये इश्क….

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