मै तेरे कुछ काम न आया

माफ करना ऐ भारत मॉ
मै तेरे कुछ काम न आया
सारी उमर तो बस मैने
पेट भर अनाज कमाया
माफ……..
जब जब बढे दुश्मन के हाथ
तेरे दामन के आस पास
चिन्गारी दिल की बन गई आग
मै भी होता सरहद पर आज
माफ……….
लेकिन ये कहा सम्भव था
काश मेरा भाग्य प्रबल होता
जिन्होने की तेरी बुलन्द आवाज
उन वीरो को सत सत प्रणाम
जिसने भी बढाया मान तेरा
कुछ किया जिससे बढा नाम तेरा
उनका ही जीवन सफल प्रमाण
उन सब को हैं सत सत प्रणाम
माफ…….
होता है मुझको अफसोस
यह जीवन मेरा बेकार हुआ
वह जीवन ही क्या जीवन है
जिससे न वतन का काम हुआ
ऐ प्रभू मेरी सुन ले फरियाद
आगला जीवन हो एैसा पास
हर पल हो जो वतन के लिए
वो जीवन मेरा हो सके सुकाज
माफ…..

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