मै मुद्रा चंचल बलवान

मै मुद्रा चंचल बलवान
मेरी तो है अलग पहचान
कभी मैं किसी के साथ
कभी मै किसी के पास
मेरा नही कोई निश्चित स्थान
मैं…..
प्रातः की सुरूआत मुझसे
राञी का विराम मुझपे
द्वापर ञेता मे भी था मान
पर आज मेरा है सर्वोच्च स्थान
मैं……..
हो गई मै जिसके साथ
बना दिया मैने उसको मान
रूठ गई मै जिससे भी
दूर हुए उससे उसके भी
मेरे बिना कहा है मान
मैं……….
कभी मै ठोकर खाती थी
रृिषि मुनी सदाचारी से
कभी मै ठुकराई जाती थी
प्रेम और रिस्तेदारी मे
पर आज कहा वैसे इन्सान
मै…….
मेरे बिन बुद्धी भी रह जाती है धरी हुई
मेरे बिना विद्ववानो के विद्वानी का भी मोल नही
शक्ती तो देखो मेरी शलामी पाए अनपढ भी आज
मुझे पा दुराचारी भी पा जाते है जहा मे मान
मैं………

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