दर्दे दिल

प्यार करते हैं सब प्यार मैने भी किया
फर्क अॉखो से कहा लव खोला ही नही
जागते रहे रातो को जिन्हे सोच कर
उस बेदर्दी से हाले दिल कहा ही नही
प्यार…….
जिसकी एक झलक को गलियो मे फिरे
उनके चौखट पर नजरे टिकाते रहे
जाना हो हमे चाहे भी कही
उसकी गलियो से रस्ते बनाते रहे
तड़पते रहे हम जिनके लिए
उससे दर्दे हाल अपना कहा ही नही
प्यार………
वो दिवानेपन को मेरे समझते तो थे
शायद वो भी प्यार करते तो थे
पर उल्फत सारी लिए दिल मे वो
तड़पते हुए छोर कर चल दिए
करू कैसे व्या उन दर्दे दिनो का
बिन पानी मछली से तड़पते रहे
प्यार……….
गुजरे है जमाने उन्हे बिछड़े हुए
पर वो अब भी नजारे जवा दिल मे हैं
झुक जाती थी नजरे टकरा नजरो से
और मुस्कुराते थे वो हम खिलखिला जाते थे
अब सताते है वही जो हसाते थे कभी
हाय बेदर्दी उन अदाओ को हम कहने लगे
प्यार……….
सोचते हैं हाय क्या मिला है हमे
क्यो दर्दे मुहाब्बत से गुजरे थे हम
जो गुजरे थे तो फिर कहा क्यो नही
क्यो गैर जमाने से डरते थे हम
सच कहते है लोग ईश्क दरिया हैं एक
जो साहिल मिले तो प्यारा लगे
जो बिछड़े तो फिर बिछरते सब गये
दर्दे नीर सिवा न कोई नजारा मिले
प्यार……

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