।।हाइकू।।बढ़ते चल।।

।।हाइकू।।बढ़ते चल।।

वक्त का पौधा
हरियाली पनपी
मिलती राहे ।।

तकलीफों का
पुनः पुनः प्रहार
बढ़ते चल ।।

झुलसे क्यों
हम पाकर साथ
अनुभव का ।।

R.K.M