ऐ मनवा तू गरूर न करिहे

ऐ मनवा तू गरूर न करिहे
जाने कौन होए कब दूर
कोहू से कोनो आश न करिहे
जाने जाई कब सब छूट
आपन बस तू फर्ज अदा कर
धर्म से करम करीते जल जरूर
होइहे वही जे भोले नाथ के मर्जी
फलवान सोच न हो मगरूर
ऐ………
कौन जाने कब याद करिहे बाबा
जाए पड़ी सब छोर के दूर
पंछी छोड़ के पिंजरा उड़ जइहे
अधूरन रह जइहे काजन कूल
न कोनो रिस्ता न कौनो नाता
छूट जइहे यही आपन कूल
ई आपन है ऊ आपन है
न सोच हो तनिको मगरूर
ऐ…..
जोन तनवा देख सजनी सवरे
माय बाबू देखे नाज नयन
उहे तनवा अछूत हो जइहे
जार दिहे मिल समाज अापन
जोन हथवा धर चलावन सिखईले
उहे हथवा दिहे मुख आगन
काहे न ले फेर नाम बबा के
जाए पड़ी जहा सबके तजन
ऐ…
सब कुछ जान अनजान न बन तू
जान के कौनो पाप न कर तू
होइहे वही जे करम विधाता लिखले
हाय हाय मे प्राण न तज तू
रुपा टका कुछ साथ न जइहे
मिलिहे बबा से खाली बिन रूप
जप ले मनवा हर हर बम बम
धरम करम जाई संग जरूर
ऐ……

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