तेरा साथ

एक मरूस्थल थी जिन्दगी
अकेला ही था चल रहा
दूर तक बस धूप ही था
नीरस बोझल दिन था मेरा

तेरा आना जिन्दगी में
जैसे की रिमझिम फुहार सी
तेरा साथ लगे मुझको ठन्डी मीठी छाव सी
उल्फते दरिया को मैने पार जैसे कर लिया
तुझको पा कर मैने अपना बहारो से दामन भर लिया

और क्या था चाहिए मुझे जिन्दगी मे तेरे सिवा
कम नही थे एहसान तेरे एक और तूने कर दिया
बना दिया मुझको पिता मेरा आंगन सूना भर दिया
जिन्दगी से मुहाब्बत का एक और कारण जन दिया

अमीरी नही थोड़ी सही कोई नही सिकवा मुझे
जिन्दगी मे जो मिलता रहे तेरे प्यार का झरना मुझे
बस चाहता हू मालिक से इतना दुआ कबूल हो
मेरे रहते न कभी तेरा आखरी सफर मंजूर हो

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