हवा की सरसराहट

ये हवा की सरसराहट के असर है कैसे कैसे
किसी दिल को लगते मीठे किसी दिल को सूल जैसे
कुछ कह रही हैं फिर से ये खामोश काली राते
कोइ सुन के इनको हर्षे कही नैना दर्द बरसे
ये……….
चल दिये हैं फिर से मगरूर बादल बन के
किसी तन पे इसकी बून्दे पड़े तो सोले भड़के
कही जख्मी दिल के जख्मो को फिर से ये कुरेदे
लगने लगे वो प्यार फिर आज दर्द जैसे
ये………
कड़कने लगी है बिजली
तूफान उठा दिल में
कही दो जिस्म आज लिपटे
कही तड़पे फिर दिल के टुकड़े
करने लगे हैं हरकत ये कुछ सौतेले जैसे
ये़………..
ऐ दिल क्या नही बन सकते
हम फूलो के चमन डाली से
जो छूट गए उसे भूल फिर जने कली प्यारी से
आजा कदम बढाए फिर एक नए रस्ते पे
भुला दे हम उसको जो भुलाए हैं हमे कबसे
ये………

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