दरीन्दे छूट जाते हैं

हुआ ये हाल की अबतो दरिन्दे छूट जाते हैं
लगा कर पैतरा कानून को ठैंगा दिखाते हैं
छोटे हो शिकार तो केश ही दर्ज नही होते
बहुत जेर लगाने पर भी फाईल आगे नही बढते
मिडिया हो हरकत मे तो मजबूरी बन जाती हैं
फिर भी कोट का फैसला जीते जी कम ही आते हैं

वैसे तो हमने वर्दी गुणडो को पहनाये हैं
बहुत कम हैं एैसे जो देश प्रेम से आए हैं
इनके भी आधे हौसले बईमानो ने तोर दिए
बचा खुचा आधा रहा जो नेताओ ने मौन किए
एैसे मे बताओ कहा हैं स्वतंञ हिन्दुस्तान
घुट घुट कर के जी रहा हैं हर एक इन्सान

आज हमे फिर से क्रांती करना होगा
गैरो से नही हमे अपनो से लड़ना होगा
इन्सा के रूप मे छुपे भेड़ियो को चुनना होगा
किसी एक अकेले को नही सभी को चलना होगा
एक दूजे के दर्द को जब महसूस हम करेंगे
हम गुनहगारो का अंत कर सकेंगे

होंगे तभी दरिन्दे कानून की गिरफत मे
होंगे तभी फैसले इन्सीनियत के हक मे
जब हम सारी व्यवस्था खुद से ही चलायेंगे
देश के ठेकेदारो को कर्त्वय बोध करायेंगे
तभी हमारा भारत सबसे महान बनेगा
हॉ सारी दुनिया मे इसका अलग पहचान बनेगा

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