ऐ जिन्दगी तुझसे सिकवा करू क्या

ऐ जिन्दगी तुझसे सिकवा करू क्या
तेरे हर रंग से मै मुहाब्बत करूंगा
तू देदे गम कोई सिकवा नही हैं
काटो की राहो पे भी मैं चलूंगा
खुशी न मिले तो क्या हुआ मैं
गमो की मेहफिल में भी हसूंगा
ऐ………….
जो रिस्ते नाते दिये हमको तूने
ईनको तो मैं सम्भाले रखूंगा
होती जाए और भी मुहाब्बत हममे गहरी
तुझसे बस ये ही चाहत करूंगा
तू मत दे हमे नही बहुत की जरूरत
थोड़े मे भी मै गुजारा करूंगा
ऐ जिन्दगी…………
हर फर्ज हमसे अदा होती जाए
कोई न हमसे जुदा होने पाए
नही मांगता कुछ और उससे
इतना ही वो हमे काबिल बनाए
क्या हैं जरुरत जमा करने की
मैं रिस्तो को ही जमा पूंजी कहूंगा
ऐ……….
क्या हैं कमी मुझको क्या गम हैं
जो मेरे अपने मेरे संग हैं
हर रंग हो जाए गम का फीका
जो साथ मेरे अपने निभाए
हसरत नही कोई हैं और तुझसे
ईतने मे जीवन सफल मैं समझूंगा
ऐ……….

2 Comments

  1. Dushyant Patel 05/07/2015
    • arun kumar jha arun kumar jha 13/05/2017

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