मुझको तो चलते जाना हैं

सौ खाब सजाये थे मैने
सब टूट गया तो क्या हो गया
एक खाब सजा कर फिर से मुझे
कोशिस दुबारा करना हैं
एै किस्मत मैं क्या करू
आदत से मजबूर हू
चलने की मेरी आदत हैं
मुझको तो चलते जाना हैं

जिस राह पे चलना था मुझको
वो राह तो तूने छीन लिया
कोशिस मैने कई बार किया
तूने हर कोशिस नकाम किया
सीधी राह मुझे न मिली
घूम के मन्जिल पाना हैं
ऐ किस्मत………..
बहूत को तूने बर्बाद किया
बहुत की मट्टी खराब की
कुछ गिरे तो फिर सम्भले ही नही
कुछ सम्भले तो पर बढे नही
कुछ बढे तो फिर इतने आगे
की तूने भी उन्हे सलाम किया
मुझको भी इन लोगो मे अपना नाम लिखवाना हैं
एे……….
कब तक तू रूठेगा मुझसे
कब तक मुझे सताएगा
कब तक मेरी कोशिस की शोर
तू यू ही टालता जाएगा
इतना दस्तक दूंगा मै की तंग तू हो दाएगा
हंस के नही गुस्से मे सही तू गेट खोल बुलाएगा
ऐ…..
मै जानता हू की मंजिल सहज मे नही मिलती
जो मंजिल सहज मे मिले उसका भी मजा तो है फीका
मुझको अपनी कोशिस मे जोर और लगाना हैं
पर जो मैने ठाना हैं उसको तो मुझको पाना हैं
ऐ………

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