एक प्यास जरूरी हैं

हर इन्सा की जिन्दगी में एक चाह जरूरी हैं
कुछ करने का जजबा एक प्यास जरूरी है
मंजिल ना हो तय तो राह चल कर क्या हासिल
पेट भर भोजन मिले है यही नही मंजिल
पल पल बढना है मुझको यह आस जरूरी हैं
कुछ………..
माना खड़े रहने पर गिरने का नही डर
पर मंजिल पाने की खुसी हैं उसको कब हासिल
दौड़ नही सकता हैं तो चलना जरूरी हैं
क्योकी ठहरा पानी भी हैं कुछ दिन ही काबिल
उम्मीद की हर आखो मे वास जरूरी हैं
कुछ………..
ठोकरे मिले, हैं इसका भी मजा
महसूस कर के देख हैं ये नही सजा
नजर बस टिकाए रख मंजिल पर अपनी
धीरे धीरे बढा सही कदम तू अपनी
ठोकरे खा कर ही बच्चा सम्भलता हैं
चलता ही नही दौड़ता भी हैं, हैं बात जगजाहिर
मेहनत के साथ उस पर विश्वास जरूरी हैं
कुछ……..

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