* नारी तेरी नारीत्व *

नारी तेरी नारीत्व नहीं किसी का मोहताज।

तु ही दुर्गा तू ही काली
तु ही लक्ष्मी तू ही सरस्वती
तु है माया तू महामाया
तुझ में यह सृष्टी समाया
तुझे कोई समझ न पाया,
नर देव दानव और गन्धर्व
सब को चाहिए तेरा वर
फिर तुम क्यू इतना लचर
नारी तेरी नारीत्व नहीं किसी का मोहताज।

तु माँ है तू ही बहन
तु ही पत्नी तू ही प्रेमिका
हर सफल पुरुष के पिछे
तेरी वाणी और वरद हस्त है
फिर तु क्यू इतना अस्त ब्यस्त है
तु अपनी शक्ति को पहचान
नरेन्द्र का करे तेरा बखान
नारी तेरी नारीत्व नहीं किसी का मोहताज।

हर युद्ध में तुने हाथ बटाया
धर्म युद्ध हो या गृह युद्ध
स्वतंत्रा संग्राम हो या राजपाठ कि हो बात
अच्छे-अच्छो को तुने दिया मात
कहो तो गिना दु मै सैकड़ो नाम
फिर क्यू हो तुम बेकाम
नारी तेरी नारीत्व नहीं किसी का मोहताज।

तुझ में दृढ़ता तुझ में वीरता तु है दयावान
तेरी ह्रिदय बहुत बड़ी है
तु करे सब का कल्याण,
पिता पुत्र हो या पति
सभी के लिए है तु मूल्यवान
जिस घर में तु नहीं वह घर है नरक समान
नारी तेरी नारीत्व नहीं किसी का मोहताज।

तू आधा नहीं अधूरा नहीं
तेरे बिना ए जगत पुरा नहीं
तेरे बिना बेकार है यह ब्रह्यमाण्ड
नारी तु जाग अपनी तागत पहचान
न कर तु किसी से आशा
दिखा दे तु अपनी चमत्कार
नारी तेरी नारीत्व नहीं किसी का मोहताज।

नारी तू अब जाग अपनी तगत पहचान
न कर तु किसी का अनुकरण
दे तु सब को अपना शरण,
सभी गुणों में अग्रणी है तु
तु ही जननी तु ही करनी
न कर तू किसी से स्पर्धा
सभी का है तुझ में सर्धा
नरेन्द्र कितना उठाए पर्दा
दुनियाँ को न कर तु बेपर्दा
नारी तेरी नारीत्व नहीं किसी का मोहताज।

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