अपनी वो सभ्यता खो गई

हॉ खो गई हॉ खो गई
अपनी वो सभ्यता खो गई
हम भूल गए बापू की बात
याद नही अब तुलसी दास
जाने कहा खो गए हैं संस्कार
दौलत बन गए हैं इज्जत मान

किससे करे कोई प्रीत यहा
किससे जोड़े कोइ मीत यहा
हैं कौन बचा यहा एैसा आज
जिससे कर ले कोई सच्चा प्यार

कोई हस्ता है तो भी है राज
कोई रोता है तो भी है बात
कोई झुका है तो भी मतलब से
कोई बोला तो भी अपने हित से
मतलव का है अब हर कोई यार
मतलव के बाद नही पहचान

रोती है अब तो सच्चाई
झूठ हसी उराती है
हार रहा है ईमान यहा
बेईमानी बढती जाती हैं
इस माया की नगरी मे
ये दुनिया उलझी जाती हैं
यह देख दशा इस मानव का
ये बात लवो पे आती हैं
हॉ खो……..

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