बरसात

तपती धरती पर जब ,
बलखाकर होती बून्दा बान्दी !
घुन्घरू बान्धे हुये पैर पर ,
जब चलती जोरो से आन्धी !!

सिहरन का सन्गीत बजाता ,
बारिश का पहला खत आया !
खत का मजमून पढे तब ,
झिलमिल कमसिन अहसास समाया !!

सोन्धी -सोन्धी खुशबू का ,
अब उमड रहा सैलाब !
धरती का आसमान् से मिलन के ,
पूरे हो रहे ख्वाब !!

हरियाली हर्षित हो कर ,
हाथ फैला के बोल रही !
प्रफुल्लित हो नाच नाच के ,
भेद दिलो के खोल रही !!

कल-कल करता जल नदिया का ,
झर-झर झरने बहते है !
दावत उडाते यहा पशु पक्षी ,
खुशियो मे बाते करते है !!

Anuj Tiwari

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/07/2015
  2. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari 01/07/2015

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