गमो के आशियाने मे हर किसी का बसेरी हैं

चमकती धूप है हर घर मे रहता फिर भी अन्धेरा हैं
गमो के आशियाने मे हर किसी का बसेरा हैं
छुपाते है सभी हस्ते से दिखते हैं मुखोटो में
पर झाका जो झरोको से तो पाया वही हाल मेरा हैं
चमकती…….
कोई जरूरत भर के लिए दिन रात गवाता हैं
तो कोई और की चाहत मे शकून जलाता है
कोई रोता हैं बच्चो को तो कोई बच्चो से रोता हैं
कोई कुछ नही तो रोग से चाहे सवेरा हैं
चमकती………..
किसी को गम हैं उसका उसे सम्मान न मिला
किसी को गम है उसके लायक काम न मिला
किसी को समाज मे वो स्थान न मिला
किसी को उसका प्यार वो दिलदार न मिला
गुलाब के फूलो पर भी तो काटो का घेरा हैं
चमकती………..
इस गमे दरिया से कौन बचने पाया हैं
जो यहा जन्मा उसी ने गम उठाया है
तो क्यो न इस गमे राह को हमराह बना ले
ये मन चल संतोष का मलहम ही लगा ले
इस गमे दरिया मे एक ये ही सहारा है
चमकती……….

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