* साईकल *

साईकल की कहानी
है सदियों पुरानी
किसी ने इसकी पहिया बनाई
किसी ने ब्रेक बनाया
अनेक लोगो ने मिल इसे
सवारा-सजाया ,

इसकी उपयोगिता है अनेक
आमिर गरीब सभी के यहाँ
इसकी है पैठ
इसे न चाहिए लेन न ट्रेक
इसकी इरादा सादा है नेक ,

मानवता से है इसकी नाता
इसके नाम का यस
किसी को नहीं जाता ,

यह न है किसी देवी देवता की सवाड़ी
न है किसी कम्पनी विशेष की गाड़ी
यह वहाँ भी जाती है
जहाँ से मानवता आती है
साईकल की कहानी है
सदियों पुरानी।

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