दहेज प्रथा

वो पढी लागे कली सुन्दरता उसकी हैं घनी
वो मिले जो किसी को खिल उठेगी जिन्दगी
पर देखो कैसा खेल हैं इस देश का उलटा रेल है
सवारेगी वो घर किसी का देगा बापू रकम बड़ी
वो……
जो सहारा थी कभी वो आज एक मांग हैं
रो रहे है बाप जिनकी बेटिया संतान हैं
ये बन के शैतान अब डरा रहा हैं समाज को
बना दिया हैं बोझ इसने विश्व जननी जात को
वो़………
बन गए धनवान वो जिनके घर मे जन्मे लाल हैं
हो गए कंगाल वो जहा बेटी जनम जात है
ये सोच है उस समाज का जहा बेटी की वाह वाह हैं
बढा रहे जो देश का हर कदम पे बढ के मान हैं
वो……..
लड़के वाले बैठते हैं छाती फुलाए हुए
मागंते हैं ऐसे जैसे पाने हो चुकाए हुए
लड़की दे कर भी दानी बापू सहमाये हैं
दे कर के नोट भी वो नजरे झुकाए हैं
ऐसे क्या मुहाब्बत की पड़ सके हैं नीव कही
वो…….
पूछीए उस मॉं से क्यो आखो मे संतोष नहीं
होनी थी खुशी उस खुशी मे क्यो जोश नही
सास क्यो बोल रही बोली तानो से भरी
कारण वो मांग हैं जो होगी शादी पे खड़ी
वो……….
सच मे दहेज प्रथा सारा जन्जाल हैं
इससे ही तो घटी बेटी का मान हैं
नई ग्रहस्ती के लिए पुञी सहयोग की
ये बन गई हैं प्रथा आज कालिख इस देश की
वो…………..

2 Comments

  1. Rahul patidar 29/06/2015
    • arun kumar jha arun kumar jha 13/05/2017

Leave a Reply