ऐ भारत के वीर सिपाही

ऐ भारत के वीर सिपाही
रखवाले देश की आन के
तुम हो खड़े तो सवार देश हैं
विकाश की उड़ती यान पे
प्रचन्ड धूप हो सीतलहर
या बर्फिले तूफान हो
रूकना जहा मुशकिल हैं बड़ा
वहा पर्वत सम तुम ठार हो
ओ सच्चे नायक सपूत
झुकाता हू शीश तेरे काम पे
तुम………..
दुखी बड़े सहमे से रहते
दुश्मन से डरे से रहते
बुध्दी पर ताले आ लगते
जीवन से ग्रहन न छटते
पग पग प्रयाश विकाश अब करते
निर्भयता की आंचल मे रहके
ओ महान दानी भारत के
सब कर्जी तेरे अभय दान के
तुम……..
न हिन्दू न मूशलिमसे न सिख से न ईसाई से
तुम को प्रेम वतन से देश के हर एक भाई से
कतरा कतरा लहू दे कर इसकी मान बचाई हैं
तूने देश के हर धर्म संग अपनी धर्म निभाई हैं
ओ सच्चे धर्मात्मा तेरा धर्म देश से प्यार मे
ऐ……….
जीवन के दिए से इक दिन तेल खत्म हो जाना हैं
जिसको जैसा रौल मिला उसको वो फर्ज निभाना हैं
तू हिरो इस चलचिञ का तेरा अभिनय बेमिसाल रहा
वतन के खातिर मिटने वाले तेरा जीवन एक मिशाल रहा
ओ सच्चे नायक इस युग के शीश झुका तिरंगा शलाम करे
तुम हे………

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