बस एक मुहाब्बत हैं सबपे भारी

हजार कारण न जीने की चाहत
बस एक मुहाब्बत है सब पे भारी
अधूरे हैं दौलत सोहरत के ठिकाने
थोरे मे मुहाब्बत हैं मुझको प्यारी

गुलाब क्यो मुहाब्बत का चिन्नहित
काटो मे कटती उसकी जिन्दगानी
भवरो से मुहाब्बत एक स्ञोत उसका
काटो मे हस्ती रहती हैं वो प्यारी

ये चान्द भटकता हैं पागल आवारा
अंधेरे में काटता जिन्दगानी
मांगे उधार सूरज अमिताभ
हस्ता हैं क्यो चान्दनी उसको प्यारी

मुहाब्बत हैं तो ये दुनिया हसी हैं
मुहाब्बत बिना कहा कुछ भी प्यारी
मुहाब्बत हैं अगर पास मे तो
राजा हैं वो हैं जो भिखारी

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