अरे हार गया तो हार गया- अरूण कुमार झा बिट्टू

अरे हार गया तो हार
पर यार कभी न हार से हार
जो हार से प्यारे हार गया
वो जीत सका न एक भी बार
हुई गलती कहा तुझ से
तू कर चिन्तन तू कर सुधार
पाना हैं तुझको जीत अभी
तू कर कोशिश यहि जीत अधार
अरे…..
सूरज तो रोज निकलता हैं
पर वो भी कभी हार जाता हैं
बादल की काली छाया
उसका वजूद मिटाता हैैं
मिटाता हैं तो मिटाता हैं
सूरज कब कर्म भूलाता हैं
निभाता हैं वो कर्म तभी
फिर से चमक पाता हैं
तू भी चमकेगा एक बार
अरे……..
बच्चा चलता हैं पेहली बार
गिरता हैं बेचारा बार बार
गिरता है फिर चलता हैं
बार बार वो फिसलता हैं
पर एक बार आता हैं एैसा
दौर मे फिसलन बदलता हैं
उठता हैं तभी तो चलता हैं
तू भी दौड़ेगा मेरे यार
अरे……..
किसान फसल लगाता हैं
खूब खाद पानी पटाता हैं
कभी बाढ कभी मौसम
उसे अपना खौफ दिखाता हैं
दिखाता हैं तो दिखाता हैं
किसान कहा डर जाता हैं
फिर जुटा हिम्मत सारी
फिर से फसल लगाता हैं
लगाता हैं तभी तो काटता हैं
तू भी काटेगा ईक बार
अरे……….
मुहाम्मद गौरी तो होगा याद
बारह बार पाई थी हार
पर तेरहवा वार कियी ऐेेसा
भेद गिराया हार दिवार
लड़ा था तभी तो जीता था
लड़ना हैं सिर्फ एक जीत अधार
अरे………

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