ऐ फूल खिले अंदाज की दुआ दे दे

ऐफूल खिले अंदाज की दुआ दे दे
मैं हर हाल मुस्कुराऊ ये अदा दे दे
दुख की तपन से दिल घबरा न सके
काटों का संग मुझे ठहरा न सके
आए तुफान डाली से मै गिर भी जाऊ
फिर भी मेरी हसी कोई चुरा न सके
बेरंग जमाने को रंगने की सदा दे दे
ऐ फूल…….
भवरो सम कोई मुझे लूट भी ले
हवाओ सम गंध मेरा झीट भी ले
कोई अपनो के लिए डाली से मुझे जुदा कर दे
कोई गूथ कर माला मुझे मूरत धर दे
बिछ जाऊ चाहे पैरो से रौंदा जाऊ
फिर भी मेरी महक कोई दबा न सके
अपने सम सहनसीलता सबल दे दे
ऐ फूल……….
न कोई जाती हो मेरा न कोई धर्म
सुख हो दुख हो ,हो मेरा भी संग
मै वीरो के सम्मान रहू जनम मरन हर काम रहू
बह जाऊ चाहे अस्थी संग गंगा के धार
फिर भी मुझसे मुहाब्बत कोई भुला न सके
सबके साथ समानता तेरी दे दे
ऐ फूल………

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